(1)
मेरी नज्में
कुछ कुछ मुझ जैसी हैं
सादा-दिल
चुप-चुप सी
जियादा कुछ नहीं कहतीं
काश मैं भी कुछ कुछ
अपनी नज्मों की तरह होती
तुम पढ़ लेते मुझे
बिना मेरे कहे !
(2)
जैसे
अपनी नज्मों को
कैसे भी शुरू करूँ
पर इक खूबसूरत से मोड़ पर ही
लाकर ...छोडती हूँ उसे
ऐ ज़िन्दगी
अन्जाने में
तुझसे भी
कुछ ऐसी ही उम्मीद
लगा बैठी हूँ मैं !
(3)
बातें
जो मैं करती हूँ खुद से
अकेले में
चाय की चुस्कियां लेते वक़्त
ढलते सूरज को निहारते हुए
तारों को गिनते-गिनते
या रात में सोने से पहले
वो सबसे खूबसूरत
नज्में है मेरी ...
दिल की सबसे प्यारी बातें
दिल की सबसे प्यारी बातें
साँस लेती हूँ
उन्ही की महक में
दफ़न ना करुँगी
किसी कागज़ी ज़मीन के नीचे
वो नज्में .....जो मेरी ज़िन्दगी सी हैं....
~Saumya


.jpg)



