साँसों के उलझे धागों को
थोड़ा सुलझाया
जज्बातों के समुंदर को
थोड़ा टटोला
एहसांसों पर पड़ी
धूल की परत भी साफ़ की
बिखरे हुए अल्फाजों को
इक्हठा किया
थोड़ा इधर …थोडा उधर से
सूखी कलम में
नयी स्याही भी डाली
और एक कोरा कागज़ लेकर
बैठ गयी ……एकांत में
अकेले ……………तारों से मुंह मोड़के………………
घण्टों बाद एहसास हुआ ……
आँसू की एक बूँद छलक कर
पन्ने पर कहीं फ़ैल गयी थी
और जो कहना चाहा था
वो हमेशा की तरह ……..…दिल में ही रह गया !
~Saumya
