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Wednesday, July 25, 2012

आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ




















आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ
मिलकर अलग सी बारिश बनाएं 
मन के बादलों से 
प्यार-मुहब्बत के मोती छलकाएं 
तिनका-तिनका खूब भिगायें 
उम्मीद का सूरज उगाकर 
ढेर सारे इन्द्रधनुष सजाएं 
आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ ।

आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ
तकदीर की लकीरें बनाएं 
उस बस्ती में जहाँ बच्चे 
काम पर जाते हैं 
उनके हाथों में कलम पकड़ाएँ 
आँखों में सपने बुनकर 
कंचों से ज़ेबें भरकर  
कागज़ की कश्ती के केवट बन जाएं 
आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ ।

आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ
हम-तुम सन्ता-क्लॉस बन जाएं 
गली-मोहल्ले में अपने-अपने
खुशियों के पैकिट बाँट आयें 
हारे को हौसला दिला दें 
रोती अँखियों को हँसा दें
दरकते बाजुओं को गले लगायें 
गुलशन-ए-ज़िन्दगी सींच आयें 
आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ । 

आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ
नेकी हो मज़हब हमारा
सच के लिए हम लड़ जाएँ
देर कितनी भी हो जाए
अँधेरा मगर होने ना पाए
मोमबत्तियां कब तक जलेंगी
रूह में अपनी रौशनी लायें
आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ । 

आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ
कण-कण में जैसे वो बसा है
हर दिल में हम भी घर जाएँ
'एक' जैसे वो खड़ा है
'एक' हम भी हो जाएँ
ज़मीं आसमां का फ़र्क छोडें 
जहाँ जाएँ जन्नत बनाएं
आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ ।  
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थोड़े तुम शिवा हो जाओ
थोड़े हम दुर्गा हो जाएँ
आओ थोड़ा खुदा हो जाएँ ।

~Saumya