Tuesday, August 14, 2012

यादें -त्रिवेणी



खिलौने जैसे... हर कमरे में... फैलाकर रखती थी ....बचपन में 
बिखरी पड़ी हैं ..... यादें तुम्हारी ..... वैसे ही कोने-कोने

कोई डाँटे........तो  समेटूं !

~Saumya

20 comments:

  1. Ah! awesome :)
    I like triveni very much
    bahut achhi hai :)

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  2. bahut achhi h :D

    mai dant du to chalega.... ? :P

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    1. Ok :)

      lagta h yaade sametne ka iraada nhi h. :)

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    2. Nope...par sab ki daant ka asar nai hota :P

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  3. बहुत खूब .. इन बिखरी यादों को कौन समेटना चाहता है ...

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  4. बहुत ही गहरी पंक्तियाँ..

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  5. Aha..triveni ! bahot khoob! :)

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Thankyou for reading...:)