Sunday, September 19, 2010

ए खुदा ,तू खैरियत से तो है?












तेरे  नाम  पर  इक  मस्जिद  गिरती  है
तेरे  नाम  पर  इक  मन्दिर  बनता  है
तेरे  नाम  पर  ऐ  ज़िन्दगी  के दाता  
मौत  का  बर्बर  खेल  चलता  है |

तू  रिश्ते  जोड़ता  है
लोग  दिल  तोड़  देते  हैं
तू  प्यार  सिखाता  है
लोग  नफरत  घोल  देते  हैं |

तू  निराकार  है
तेरे  अक्स  पर  झगडे  होते  हैं
तू  पालनहार  है
लोग  तुझे  ही  तोल  देते  हैं |

तेरे  नाम  पर  बाती  जलती  है
तेरे  नाम  पर  घाटी  सुलगती  है
तेरे  नाम  पर  बनी  रिवायतों  पर
अक्सर  ही  रूह  बिलखती  है |

दर्द  होता  होगा  तुम्हें ,देखकर  यह  सब
आँखें  नम  हो  जाती  होंगी  अक्सर  तुम्हारी
ए खुदा  ,तू  खैरियत  से  तो  है ?
तेरी सलामती की दुआ अब मैं किस्से मांगूँ?

~Saumya

61 comments:

  1. सौम्या ...

    तुम्हारी यह रचना दिल में पैबस्त हो गयी ..बहुत सुन्दर


    दर्द होता होगा तुम्हें ,देखकर यह सब
    आँखें नम हो जाती होंगी अक्सर तुम्हारी
    ए खुदा ,तू खैरियत से तो है ?
    तेरी सलामती की दुआ अब मैं किस्से मांगूँ?

    सच क्या मांगूं ? अति सुन्दर

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  2. सौम्या ! उत्कृष्ट रचना । तुम्हे कवित्व की दैवी शक्ति प्राप्त है । कभी अहंकार न आए हमारी बिटिया को ।

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  3. behad khoobsurat... keep writting...

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  4. goodness me...
    awesome piece of writing....
    keep it up yaar....

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  5. Beautiful as always.
    It is pleasure reading your poems.

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  6. Mindblowing creation hai yaaar sahi me blog par aane ka bhi mood nahi tha par aakar thakan si kam ho gyi ek sunder rachna ko padhke ..jus too tooo good :)

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  7. ईश्वर की ही खैरियत पूछना.. ! वाह कमाल का थोट है

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  8. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 22 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  9. "तू निराकार है
    तेरे अक्स पर झगडे होते हैं
    तू पालनहार है
    लोग तुझे ही तोल देते हैं |"

    यही सच है. ये रचना मुझे इतनी अच्छी लगी,
    कि इसकी तारीफ़ के लिए
    मेरे पास शब्द भी नहीं है .
    चलो.....ऊपर लिखे शब्दों को ही उठा लेता हूँ .

    "सौम्या! उत्कृष्ट रचना। तुम्हे कवित्व की दैवी शक्ति प्राप्त है ।"--श्री अरुणेश मिश्र .
    अरुणेश जी ...मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ.

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  10. बहुत दिनों....... बाद आपके ब्लॉग पार आना हुआ

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  11. When I read the title, I thought the post would be replete with sarcasm: asking God if he's happy sleeping in peace while his men down below are wreaking havoc.

    But the verses happened to be even more enchanting. As always, carefully selected theme and well implemented.

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  12. जस्ट वन वर्ड: अमेज़िंग!
    आशीष
    --
    बैचलर पोहा!!!

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  13. काफी अच्छी तरह से व्यक्त किया है अपने खुदा के ऊपर चलते विवादों को .....खासकर अंतिम अंतरा मन में बैठ गया...

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  14. wow... loved the last two lines.

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  15. सच में आज आपकी ये रचना पढ़ कर खुदा के हालात को इतनी बारीकी से समझ कर आँखे नम हो गयी.

    सुंदर अति सुंदर रचना.

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  16. तू निराकार है
    तेरे अक्स पर झगडे होते हैं
    तू पालनहार है
    लोग तुझे ही तोल देते हैं |

    bahut achha......this poem came on d time.....as we r getting rslt of ram-mandir on 24th.

    really a good poem........

    meine b kabhi likha tha........

    मजहब क्या है?


    मजहब क्या है?


    मज़े से,
    पापों को करते जाना
    फिर,
    गंगा-स्नान कर उन्हें
    धो डालना,
    या
    मक्का यात्रा कर,
    पिचाश की शिला को,
    पत्थरो से पीटना?
    या फिर,
    जब पाप फिर भी न मिटे तो,
    दूसरों पे इन्हे थोप कर,
    उन्हें जिंदा जलाना,
    मारना,
    किसी की इज्जत लूटना.
    इंसान का इंसान को काटना ही
    मजहब है?


    मजहब क्या है?
    इंसान को इंसान से बांटने का तरीका,
    या...इससे भी बदतर कुछ और?

    http://anaugustborn.blogspot.com/2009/12/blog-post_09.html

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  17. भावनाएँ अच्छी झलकती हैं इस रचना से

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  18. कल गल्ती से तारीख गलत दे दी गयी ..कृपया क्षमा करें ...साप्ताहिक काव्य मंच पर आज आपकी रचना है


    http://charchamanch.blogspot.com/2010/09/17-284.html

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  19. So brilliantly written. Truly an irony in every Indian's life. Very relevant in these current times also.

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  20. खुदा ! तू खरियत से तो है ...
    वाह , जिस खुदा से खैरियत की दुआ मांगते रहे , आज उसकी खैरियत की फिक्र हो गयी है ...
    बहुत खूब !

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  21. हम तो अपने घर तो संभालने में ही पस्त हो गए, मालिक जाने कैसे पूरी दुनिया सम्भालता होगा .. ! सुन्दर रचना, लिखते रहिये ..

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  22. आप की रचनाएँ सोच और सच्चाई की पकड़ वाली हैं...

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  23. तेरे नाम पर बाती जलती है
    तेरे नाम पर घाटी सुलगती है
    तेरे नाम पर बनी रिवायतों पर
    अक्सर ही रूह बिलखती है....a beautiful and touching commentry on the present scenerio...well expressed....

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  24. बहुत गहराई है इस रचना में
    सामाजिक सन्दर्भ को यूँ ही जीवित रखें

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  25. Bahut oopar aasman mein rehta hai khuda..
    Sunder chamkati dikhti hai oose door se Dharaa
    Sab achha dekh kar bas khush ho jataa hoga
    Aur phir muh pher kar aaram se so Jaata hoga..

    Well, Saumya I wrote an English verse years ago and your poem tempted me to translate and put it here.. Thanks a lot for making God remember that HE needs to look down at us too..

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  26. behtareen...aakhir ki do lines toh lajawaab hain..
    ए खुदा ,तू खैरियत से तो है ?
    तेरी सलामती की दुआ अब मैं किस्से मांगूँ?


    m sure ayodhya issue is somewhr in the soul of the idea! definitely its sad! i wish the poetry had d power to completely change the world!

    Well written!

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  27. This is what I think as a deep echo from heart.. aaj khuda bhi kuch nahi kar sakta wo aapne hi kaydon se majbur hai.

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  28. ================================
    मेरे ब्लॉग पर इस बार थोडा सा बरगद..
    इसकी छाँव में आप भी पधारें....

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  29. आज ही मैंने ब्लोगिंग शुरू की है और सबसे पहले आपके ब्लॉग पर आया हूँ . आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा, इस ब्लॉग पर आना सफल हो गया. आपने अपनी कविता में जो बातें कही हैं, मै उनसे सहमत हूँ. आप बहुत अच्छा लिखती हैं .
    आपकी इस उम्दा कविता के लिए आभार .

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  30. @sangeeta ji:thank you ma'am!!

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  31. @arunesh ji:aapne tto nishabd kar diya...phir bhi...thanks a lot!!God bless!!

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  32. @anand:i'm blessed to have such wonderful readers too...thank you so much!

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  33. @vandana:that's good...thank you dear:)

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  34. @virendra ji:thanks a million!!

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  35. @vivek:thanks a lot...ya I read this one of yours...it's too good!

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  36. @maverick:sadly,poetry has not that power :(....thanks a lot!

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  37. @Surya:thank you for being here!

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  38. You won me with your words dear. Really how many times do we think that the One also needs someone. The One is also human enough, how else can one explain the precision and accuracy with which He follows us through the narrow, complicated lanes and by lanes, that our heart and mind take us through.

    ए खुदा ,तू खैरियत से तो है ?
    तेरी सलामती की दुआ अब मैं किस्से मांगूँ?

    I just adore these lines

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  39. सौम्या पहली बार आपको पढ़ रही हूँ ...लाजवाब .....क्या कहूं ...शब्द कमज़ोर पड़ रहे हैं आपकी प्रतिभा के आगे ....बस इसी तरह लिखती रहिये ...और एक कविमन को सुकून पहुंचाती रहिये ....मेरे जैसे बहुत होंगे ...यही आशीष देते हुए .....

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Thankyou for reading...:)